Class 10 Manushyata Questions Answer | 10th Class Hindi Chapter 5 Manushyata Questions Answer Manushyata Class 10 Hindi Questions Answers .
प्रश्न और अभ्यास
Q&A
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दीजिए :
(क) कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है ?
उत्तर - जब कोई मनुष्य अपने जीवन में सत्कर्म करता है दूसरों के लिए बलिदान देता है तो वह मर कर भी अमर हो जाता है। मरणोपरान्त भी लोग उसे श्रद्धा से याद करते हैं। ऐसी मृत्यु ही सुमृत्यु होती है। वरना जीना भी बेकार है और मरना भी बेकार है ।
(ख) यहाँ कोई अनाथ नहीं है ऐसा कविने क्यों कहा है ?
उत्तर - दुनियां में सबके स्वामी ईश्वर हैं। वे सबके पिता हैं । दयालु हैं और गरीबों पर कृपा करते हैं । उनके हाथ बहुत बड़े हैं अर्थात् वे हर दुःखी व्यक्ति को मदद पहुँचाते हैं । इसलिए कवि ने कहा है कि संसार में कोई अनाथ नहीं है ।
(ग) 'मनुष्य मात्र बंधु है' से आप क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर 'मनुष्य मात्र बन्धु है' - का अर्थ है कि सारे मनुष्य भाई-भाई हैं क्योंकि हम सब एक ही परमपिता परमेश्वर की सन्तानें हैं। बाहर से हम अलग-अलग दिखाई पड़ते हैं परन्तु अन्दर की आत्मा तो सबकी एक ही है ।
2. निम्नलिखित पंक्तियों के भाव दो-तीन वाक्यों में स्पष्ट कीजिए :
(क) 'मनुष्य मात्र बंधु है' यही बड़ा विवेक है,
पुराण पुरुष स्वयंभू पिता प्रसिद्ध एक है ।।
उत्तर - कवि मैथिलीशरण गुप्त जी कहते हैं कि सबसे बड़ी विवेकपूर्ण बात यह है कि हम सभी मनुष्य भाई-भाई हैं । हम सब के परमपिता एक ही परमेश्वर हैं जो पुराण- पुरुष हैं और स्वयं उत्पन्न हुए हैं। जब हम एक ही परमपिता की सन्तानें हैं तो भाई-भाई ही हैं।
(ख) रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में ।
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में ।।
उत्तर - कवि मैथिलीशरण गुप्त जी कहते हैं कि धन सम्पत्ति तुच्छ हैं, महत्वहीन हैं। इस निस्सार वस्तु को पाकर कभी भी भूल से भी अहंकार में अन्धे नहीं होना चाहिए । किसी का स्वामी बलशाली या प्रभुत्ववाला है तो इस बात का उसके मन में घमण्ड नहीं होना चाहिए, क्योंकि दुनियां में अनाथ कोई भी नहीं है
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द / एक वाक्य में दीजिए :
(क) कवि किससे न डरने की बात कर रहे हैं ?
उत्तर - कवि मृत्यु से न डरने की बात कर रहे हैं ।
(ख) कवि कैसी मृत्यु को प्राप्त करने का परामर्श दे रहे हैं ?
उत्तर - कवि उस मृत्यु को प्राप्त करने का परामर्श दे रहें हैं जिसके उपरान्त लोग मृत व्यक्ति को याद
करें ।
(ग) कवि मनुष्य की किस पशुप्रवृत्ति की बात कर रहे हैं ?
उत्तर - कवि मनुष्य अपने आप चरने अर्थात् खाने की पशुप्रवृत्ति की बात कर रहे हैं ।
(घ) मनुष्य क्या पाकर मदांध हो जाता है ?
उत्तर - मनुष्य धन-सम्पत्ति पाकर मदांध हो जाता है ।
(ङ) सनाथ होने का घमण्ड क्यों नहीं करना चाहिए ?
उत्तर - सनाथ होने का घमण्ड नहीं करनाचाहिए क्योंकि दुनियाँ में अनाथ कोई नही है, ईश्वर सबका स्वामी है ।
(च) भाग्यहीन कौन है ?
उत्तर - वे लोग जो धन-दौलत पाकर अपना धैर्य खो देते हैं वे भाग्यहीन हैं ।
(छ) संसार में मनुष्य का बंधु कौन है ?
उत्तर संसार में सभी मनुष्य एक दूसरे के बन्धु हैं ।
(ज) पुराण पुरुष हमारे क्या हैं ?
उत्तर - पुराण पुरुष हमारे स्वयंभू पिता है ।
(झ) वेद किसका प्रमाण देते हैं ?
उत्तर - वेद इस बात का प्रमाण है कि मनुष्य बाहर से अलग-अलग दिखाई देने पर भी अन्दर से उनमें एकरुपता है ।
(ञ) कौन बंधु की व्यथा हरण कर सकता है ?
उत्तर - एक बन्धु ही अपने बन्धु की व्यथा हरण कर सकता है ।
भाषा-ज्ञान
1. उपयुक्त विभक्ति-चिह्नों से शून्य स्थान भरिए :
( से, में, के, का, को, के लिए )
(क) फलानुसार कर्म---------------- अवश्य वाह्य भेद हैं ।
(ख) वेद अंतरैक्य----------------प्रमाण हैं ।
(ग) वही मनुष्य है जो मनुष्य----------------मरे ।
उत्तर - (क) के (ख) में (ग ) के लिए
-
2.निम्नलिखित शब्दों के लिंग बताइए :
प्रवृत्ति, अंतरिक्ष, मृत्यु, विचार, व्यथा, अनर्थ ।
उत्तर -
प्रवृत्ति - स्त्रीलिंग
अंतरिक्ष - पुलिंग
मृत्य - स्त्रीलिंग
विचार - पुलिंग
व्यथा - स्त्रीलिंग
अनर्थ - पुलिंग
3. निम्नलिखित शब्दों के प्रयोग से एक-एक वाक्य बनाइए :
विवेक, प्रवृत्ति, मर्त्य, बंधु, व्यथा ।
उत्तर- (i) विवेक : मुश्किल में विवेक से काम लेना चाहिए ।
(ii) प्रवृत्ति भिखारी को कितना भी देदो, उसकी मांगने की प्रवृत्ति कभी नहीं जाती
(ii) मर्त्य : पृथ्वी लोक को मर्त्य लोक भी कहते हैं ।
(iv) बंधु : हमें अपने बंधु की सहायता करनी चाहिए ।
(v) व्यथा : उसके मन की व्यथा कोई नहीं सुनता है |
अतिरिक्त प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित पंक्तियों के भाव दो-तीन पंक्तियों में स्पष्ट कीजिए :
(क) वही पशु प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।
उत्तर - कवि ने यहाँ मनुष्यता और पशुता का अन्तर बताया है । आज का मनुष्य अपने स्वार्थों की पूर्त्ति हेतु लोकहित जैसी भावना को भूलता जा रहा है। जो मनुष्य अपने लिए जीता है, वह पशु के समान है क्योंकि पशु के जीवन का उद्देश्य सिर्फ खाना और सोना होता है । वह भी स्वयं खाता है, दूसरों को नहीं खिलाता है । मनुष्य वह है जिसका जीवन लोक हित में व्यतीत होवे ।
(ख) फलानुसार कर्म के अवश्य बाह्य भेद हैं
परन्तु अन्तरैक्य में प्रमाणभूत वेद है ।
उत्तर - कवि कहते हैं कि बाहर से सभी मनुष्य अलग-अलग दिखाई पड़ते हैं क्योंकि सब अलग अलग कर्म करते हुए नजर आते हैं और उनके फल भी भिन्न-भिन्न दिखाई देते हैहं । पर वेद इस बात का प्रमाण हैं कि अन्दर से सभी मनुष्यों में एक रुपता है क्योंकि उन कर्मों को सम्पादित करने वाली आत्मा तो एक ही है जो परमात्मा की अंश मात्र है।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए :
(क) कवि मैथिलीशरण गुप्तजी के अनुसार कौन सा कार्य बहुत बड़ा अनर्थ है ?
उत्तर - कवि के अनुसार एक भाई यदि दूसरे भाई के दुःख को दूर न करे तो यह अनर्थ
(ख) 'मनुष्यता' कविता के रचयिता कौन हैं ?
उत्तर. - मनुष्यता' कविता के रचयिता श्री मैथिलीशरण गुप्त हैं ।
(ग) कवि के अनुसार सबसे बड़ा विवेक क्या है ?
उत्तर - कवि के अनुसार यह समझना कि सारे मनुष्य आपस में भाई-भाई हैं, सबसे बड़ा विवेक है ।
(घ) दयालु दीन बन्धु के विशाल हाथ होने का क्या अर्थ है ?
उत्तर - विशाल हाथ होने का अर्थ है कि ईश्वर अपनी सभी सन्तानों को दुःख में मदद पहुँचा ही देते
हैं ।
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